• भारत के सभी नागरिक सूचना के अधिकार कानून के तहत किसी भी सरकारी विभाग या सार्वजनिक संस्थान की जानकारी हासिल कर सकते हैं। आरटीआई कानून के तहत आवेदन करने और जानकारी हासिल करने की पूरी प्रक्रिया।
भारतीय संसद ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए साल 2005 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून बनाया था। इस कानून के तहत भारत का कोई भी नागरिक सरकार के किसी भी विभाग की जानकारी हासिल कर सकता है। आरटीआई हाथ से | लिखकर या टाइप करके या फिर ऑनलाइन लगाई जा सकती है।
आरटीआई अधिनियम की धारा 20 में कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी सूचना निर्धारित समय पर नहीं देता है, तो उस पर 250 रुपये रोजाना की दर से जुर्माना लगाया जाएगा. जुर्माने की यह राशि 25 हजार से ज्यादा नहीं | होगी. इसके अलावा केंद्रीय सूचना आयोग या फिर राज्य सूचना आयोग ऐसे अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने की सिफारिश कर सकते हैं।

केंद्र और राज्य सरकारें बहुत सारी योजनाओं आपके कल्याण के लिए। लाती है परंतु उसके बारे में जानकारी तथा उस योजना का लाभ जागरूकता के अभाव में जन-जन तक नहीं पहुंच पाती है, इसके चलते जिन्हें इसका लाभ सही में मिलना चाहिए (जो सही में योजना के दायरे में आते हैं) उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता यह एक अकाट्य सत्य है।

“अब हम आपके साथ हमेशा खड़े हैं आपको सारी सरकारी योजनाओं के संपूर्ण जानकारी के बारे में बताने तथा लाभ दिलवाने के लिए।”

आपके हित की रक्षा के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के संबंधित विभागों से पत्र व्यवहार करना एवं आवश्यकता पड़ने पर, आप के की रक्षा के लिए न्यायालय में जाना।

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भारत के सभी नागरिक सूचना के अधिकार कानून के तहत किसी भी सरकारी विभाग या सार्वजनिक संस्थान की जानकारी हासिल कर सकते हैं। आरटीआई कानून के तहत आवेदन करने और जानकारी हासिल करने की पूरी प्रक्रिया।

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