आप भी राज्य सरकार द्वारा राज्य में चलायी जा रही किसी योजना, कार्यक्रम एवं सेवा का लाभ प्राप्त करना चाहते हों अथवा इसके संबंध मं कोई शिकायत हो तो निःसंकोच परिवाद दायर करें तथा इस पारदर्शी, जवाबदेह, प्रभावकारी एवं लोकोपयोगी व्यवस्था का लाभ उठावें।
सर्व साधारण की शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा में समाधान कराने के उद्देश्य से शिकायत का तुरंत निबंधन संख्या/पावती प्रदान करते हुए सुनवाई की तिथि बतायी जाती है तथा शिकायतकर्ता एवं शिकायत के विषय से संबंधित सरकारीकर्मी के आमने-सामने सुनवाई कर शिकायत का समाधान किया जाता है। साथ ही, निर्णय की प्रति भी उपलब्ध कराई जाती है ताकि निर्णय से व्यथित होने की स्थिति में अपील दायर किया जा सके।
उत्तर – आम लोगों की शिकायतों के निवारण एक निश्चित समय सीमा के अंदर शिकायत के निष्पादन हेतु बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम लागू है । निश्चित समय-सीमा के भीतर किसी शिकायत पर सुनवाई एवं उसके निवारण का अवसर और शिकायत पर सुनवाई में किये गये विनिश्चय/निर्णय के बारे में सूचना प्राप्त करने का अधिकार है|

इस कानून से सभी आवेदकों को 60 कार्य दिवसों में –

  • उनकी शिकायतों की सुनवाई
  • उसके निवारण का अवसर तथा
  • उस पर निर्णय की सूचना प्राप्त होने का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है।

शिकायत का तुरंत निबंधन संख्या/पावती प्रदान करते हुए सुनवाई की तिथि बतायी जाती है तथा शिकायतकर्ता एवं शिकायत के विषय से संबंधित सरकारीकर्मी के आमने-सामने सुनवाई कर शिकायत का समाधान किया जाता है। साथ ही, निर्णय की प्रति भी उपलब्ध कराई जाती है ताकि निर्णय से व्यथित होने की स्थिति में अपील दायर किया जा सके।

उत्तर -कोई भी आम नागरिक या नागरिकों का समूह, शिकायत दर्ज कर सकता है ।

उत्तर – राज्य में चलाई जा रही किसी योजना, कार्यक्रम या सेवा के संबंध में कोई लाभ प्राप्त होने में हो रही देरी, निश्चित समय-सीमा के भीतर नहीं मिलने पर या विलम्ब के संबंध में, या किसी लोक प्राधिकार के कृत्यकरण में विफलता से, या उसके दर्ज राज्य में प्रवृत्त

किसी विधि, नीति, सेवा, कार्यक्रम या योजना के उल्लंघन से उदभूत किसी मामले के संबंध में शिकायत दर्ज किया जा सकता है । 

सुविधा के लिए परिवाद दायर किये जाने वाले विषयों की सूची लोक शिकायत प्राप्ति केन्द्रों एवं वेबसाईट पर उपलब्ध है।

उत्तर –

  • अनुमंडल, जिला एवं राज्य मुख्यालय में अवस्थित लोक शिकायत प्राप्ति काउंटर पर जाकर अथवा
  • ऑन लाईन- वेब पोर्टल http://lokshikayat.bihar.gov.in द्वारा अथवा
  • कॉल सेंटर के टॉल फ्री नं0- 18003456284 के माध्यम से अथवा
  • ई-मेल info-lokshikayat-bih@gov.in से अथवा डाक द्वारा।
उत्तर – कोई भी व्यक्ति, जो अधिनियम के अधीन सुनवाई और उसके निवारण का इच्छुक हो प्रपत्र-1 अथवा सादे कागज में अपना नाम, पता, मोबाईल/फोन नम्बर, ई-मेल, आधार कार्ड संख्या और शिकायत की विशिष्टयों का उल्लेख करते हुए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को शिकायत प्रस्तुत करेगा किन्तु मोबाईल/फोन नम्बर, ई-मेल एवं आधार कार्ड संख्या का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं होगा । शिकायत डाक दर्ज  अथवा ऑन लाईन भी दर्ज किया जा सकता है ।
उत्तर – किसी एक आवेदन पत्र में किसी एक ही लाभ या राहत का दावा किया जा सकेगा, अर्थात् किसी एक ही विभाग/लोक प्राधिकार से संबंधित शिकायत दर्ज करायी जाएगी। यदि कोई दो या अधिक विषयों पर शिकायत दर्ज करना चाहता है तो उसे इसके लिए अलग-अलग आवेदन पत्र देना होगा ।
उत्तर – जहॉ शिकायत प्राप्त करने वाला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी यह पाता है कि शिकायत की विषय-वस्तु किसी अन्य लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की अधिकारिता के भीतर है, तो वह शिकायत को संबंधित लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को अंतरित कर देगा और शिकायत प्राप्त करने के सात दिनों के अन्दर, ऐसे अंतरण की सूचना शिकायतकर्ता को देगा।
उत्तर – शिकायत प्राप्त होने पर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या उनके दर्ज प्राधिकृत कोई अन्य पदाधिकारी या कर्मचारी या केन्द्र प्रभारी शिकायतकर्ता को प्रपत्र-2 में शिकायतकी पावती देगा। शिकायत की पावती रसीद (प्रपत्र-2) पर ही शिकायत की सुनवाई और निवारण के लिए निर्धारित प्रथम तिथि अंकित रहेगी। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त होने वाले शिकायत की पावती प्रपत्र-2 के बदले उसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त होगा।
उत्तर – लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिकायत प्राप्त होने पर नियत समय-सीमा के भीतर शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा । सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेगा । लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिकायतकर्ता को सुनवाई का समुचित अवसर देने के उपरांत तथा संबंधित लोक सेवक दर्ज  प्रस्तुत अभिलेख के अवलोकन के पश्चात मामले के संबंध में नियत समय-सीमा के अंदर अपना निर्णय पारित करेगा । लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिकायतको, स्वीकार करते हुए या किसी अन्य विधि, नीति, सेवा, कार्यक्रम या योजना के अधीन उपलब्ध कोई वैकल्पिक लाभ या अनुतोष सुझाते हुए या उसे खारिज करते हुए, जिसके कारणों को लेखबद्ध किया जायेगा, विनिश्चित करेगा और नियत शिकायतपर अपने विनिश्चय से शिकायतकर्ता को संसूचित करेगा।
उत्तर – लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को किसी शिकायत का विनिश्चय करते समय वहीं शक्तियां प्राप्त होगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या-5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय किसी सिविल न्यायालय में निहित होती है ।
उत्तर – लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिकायतकर्ता को मामले में पारित अपने निर्णय से प्रपत्र-3 में अवगत करायेगा । इसकी जानकारी बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के लिए बनाये गये पोर्टल से भी प्राप्त की जा सकती है ।
उत्तर – कोई भी व्यक्ति जिसे नियत समय-सीमा के भीतर सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं किया गया हो या जो लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के निर्णय से व्यथित हो, प्रथम अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील दर्ज कर सकता है । यदि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं कर तो ऐसे अनअनुपालन से व्यथित कोई व्यक्ति सीधे प्रथम अपीलीय प्राधिकार को शिकायत प्रस्तुत कर सकता है ।
उत्तर – प्रथम अपील, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के निर्णय/विनिश्चय हेतु नियत किये गये समय-सीमा की समाप्ति से अथवा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के विनिश्चय की तारीख से तीस दिनों के भीतर की जा सकेगी। परंतु प्रथम अपीलीय प्राधिकार तीस दिनों के पश्चात परन्तु अधिक से अधिक पैंतालीस दिनों तक अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसको यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी पर्याप्त कारण से समय पर अपील दर्ज करने सें वंचित रहा है। प्रथम अपीलीय प्राधिकार, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को उसके दर्ज  विनिर्दिष्ट समयावधि के भीतर शिकायतकर्ता को सुनवाई एवं निराकरण का अवसर प्रदान करने का विनिश्चय दे सकेगा या सुनवाई के पश्चात् अपील खारिज कर सकेगा।

उत्तर – प्रथम अपील, द्वितीय अपील एवं पुनरीक्षण आवेदन का निष्पादन करते समय –(क) सुसंगत दस्तावेजों, लोक दस्तावेजों या उनकी प्रतियों का निरीक्षण किया जा सकेगा

(ख) आवश्यकता होने पर समुचित जाँच के लिए किसी अन्य पदाधिकारी को प्राधिकृत किया जा सकेगा, और

(ग) यथास्थिति, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या प्रथम अपीलीय प्राधिकार या द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को क्रमशः प्रथम अपील, द्वितीय अपील या पुनरीक्षण में सुनवाई का अवसर प्रदान किया जा सकेगा ।

उत्तर – प्रथम अपीलीय प्राधिकार के निर्णय के विरूद्ध द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील आवेदन दर्ज किया जा सकता है। कोई व्यथित व्यक्ति सीधे द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील दर्ज कर सकता है, यदि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकार के विनिश्चय, जिसमें प्रथम अपीलीय प्राधिकार लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को उसके दर्ज  विनिर्दिष्ट समयावधि में शिकायतकर्ता को सुनवाई एवं निराकरण का अवसर प्रदान करने का विनिश्चय देता है, का पालन नहीं करता है अथवा प्रथम अपीलीय प्राधिकार नियत समय सीमाओं के भीतर अपील का निपटारा नहीं करता है तो उसके लिए द्वितीय अपील दर्ज किया जा सकेगा।
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उत्तर – द्वितीय अपील प्रथम अपीलीय प्राधिकार के निर्णय की तारीख से 30 दिवसों के भीतर दर्ज की जा सकेगी। परन्तु द्वितीय अपीलीय प्राधिकार, तीस दिनों के पश्चात परन्तु अधिक से अधिक पैंतालीस दिनों तक अपील को ग्रहण कर सकेगा यदि उनको यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय पर अपील दर्ज करने से पर्याप्त कारण से वंचित रहा है। द्वितीय अपीलीय प्राधिकार, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या प्रथम अपीलीय प्राधिकार को, यथास्थिति शिकायतकर्ता को सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने या उसके दर्ज  विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर जो किसी मामले में तीस दिवसों से अधिक नहीं होगा, अपील का निपटारा करने का विनिश्चय दे सकेगा या अपील खारिज कर सकेगा।
उत्तर – जहां द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के विचार में यह हो कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या अन्य कोई लोक प्राधिकार या प्रथम अपीलीय प्राधिकार, बिना किसी पर्याप्त और युक्तियुक्त कारण के नियत समय-सीमा के भीतर सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने में विफल रहा है, वहां वह उस पर शास्ति अधिरोपित कर सकेगा।
उत्तर – शास्ति की राशि कम से कम पांच सौ रूपये से कम और अधिक से अधिक पांच हजार रूपये से होगी। परन्तु ऐसी कोई शास्ति अधिरोपित करने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिस पर शास्ति अधिरोपित किया जाना प्रस्तावित हो, सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया जायेगा।
उत्तर – द्वितीय अपीलीय प्राधिकार दर्ज  अधिरोपित शास्ति लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या अन्य किसी लोक प्राधिकार या प्रथम अपीलीय प्राधिकार के वेतन से वसूलनीय होगी।
उत्तर – यदि द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को यह समाधान हो जाता है कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या अन्य कोई लोक प्राधिकार या प्रथम अपीलीय प्राधिकार, पर्याप्त और युक्तियुक्त कारण बतलाये बिना, इस अधिनियम के अधीन उसको समनुदेशित कर्तव्यों को निर्वहन करने में विफल रहा है, तो उस पर लागू सेवा नियमों के अधीन उसके विरूद्ध कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है ।
उत्तर – इस अधिनियम के अधीन शास्ति अधिरोपित करने के संबंध में द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के किसी विनिश्चय से व्यथित लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या अन्य लोक प्राधिकार या प्रथम अपीलीय प्राधिकार, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के विनिश्चय की तारीख से साठ दिवसों की कालावधि के भीतर पुनरीक्षण प्राधिकार के समक्ष उस विनिश्चय के पुनरीक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा। परन्तु पुनरीक्षण प्राधिकार साठ दिवसों के पश्चात किन्तु पचहत्तर दिवसों से अनधिक की कालावधि की समाप्ति के पूर्व किसी आवेदन को ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका यह समाधन हो जाता है कि आवेदक समय पर अपील दर्ज करने से पर्याप्त कारण से वंचित रहा है।
उत्तर – परिवाद, प्रथम अपील या द्वितीय अपील या पुनरीक्षण आवेदन के साथ कोई शुल्क भुगतेय नहीं है ।
उत्तर – लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी दर्ज  शिकायतपर विनिश्चय अथवा प्रथम अपीलीय प्राधिकार, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार या पुनरीक्षण प्राधिकार दर्ज  क्रमशः प्रथम अपील, द्वितीय अपील या पुनरीक्षण आवेदन के निष्पादन के लिए अधिकतम साठ कार्य दिवसों की समय सीमा निर्धारित की गयी है ।
उत्तर – राज्य की जनता को नियत समय सीमा के अन्दर उनके शिकायत के निवारण का अधिकार देने आदि के उद्देश्य से बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 को विधि विभागीय अधिसूचना संख्या-एल.जी.-1-12/2015/लेज 129, दिनांक-28.08.2015 दर्ज  अधिसूचित किया गया है। इसे 06 जून 2015 से पूरे बिहार राज्य में लागू किया जा रहा है ।
उत्तर – अधिनियम को कार्यात्मक स्वरूप प्रदान करने के लिए दिनांक-22.01.2016 को बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार नियमावली भी अधिसूचित कर दी गयी है। अधिनियम एवं नियमावली सामान्य प्रशासन विभाग एवं बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के वेबसाईट क्रमशः www.gad.bih.nic.in तथा www.bpsms.bih.nic.in पर उपलब्ध है ।
उत्तर – किसी लोक सेवक, चाहे वह सेवारत हो या सेवानिवृत्त, के सेवा मामलों से संबंधित या किसी ऐसे मामले से संबंधित, जिसमें किसी न्यायालय या अधिकरण की अधिकारिता हो या सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का केन्द्रीय अधिनियम सं0-22) के अधीन किसी मामले या बिहार लोक सेवा के अधिकार अधिनियम, 2011 के अधीन अधिसूचित सेवाओं से संबंधित शिकायतें इस अधिनियम के तहत नहीं दर्ज की जा सकती है ।

सेवा में,

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी,

………………………………..

……………………………….

(लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का नाम और कार्यालय का ऊपर पता लिखे )

        शिकायतकर्ता का नाम:-…………….

        पिता का नाम:-……………………..

       पता:-………………………………..

       मोबाइल नंबर:……………………..

       ई-मेल:……………………………..

      आधार नंबर:………………………

 

     शिकायत के लिए लाभ या राहत जिसका दावा किया जाए लिखे

     (अलग से पन्ने लगाये जा सकते हैं)

    ………………………………………………………………………..

   पदाधिकारी और विभाग का नाम जिससे शिकायत सबंधित हो                    …………………………………………………………………………

       दस्तावेज का ब्योरा (शिकायत के सबंधित )

      …………………………………………………..

       कोई अन्य सुचना जिसका आवेदन में उल्लेख करना चाहें लिख सकते हैं       ………………………………………………………………………………….

                                                                शिकायतकर्ता का हस्ताक्षर          

सेवा में,

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी,

………………………………..

……………………………….

(लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का नाम और कार्यालय का ऊपर पता लिखे )

 शिकायतकर्ता का नाम:-…………….

 पिता का नाम:-……………………..

 पता:-………………………………..

 मोबाइल नंबर:……………………..

  ई-मेल:……………………………..

   आधार नंबर:………………………

            शिकायत के लिए लाभ या राहत जिसका दावा किया जाए लिखे

(अलग से पन्ने लगाये जा सकते हैं)

 ………………………………………………………………………..

पदाधिकारी और विभाग का नाम जिससे शिकायत सबंधित हो

……………………………………………………………………………

दस्तावेज का ब्योरा (शिकायत के सबंधित )

……………………………………………………………………….

कोई अन्य सुचना जिसका आवेदन में उल्लेख करना चाहें लिख सकते हैं

…………………………………………………………………………………………

                                                                 शिकायतकर्ता का हस्ताक्षर

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